स्वामित्व योजना (SVAMITVA Yojana) भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के आबादी वाले हिस्सों में स्थित मकानों और आवासीय संपत्तियों का रिकॉर्ड तैयार करना है। इस योजना के तहत ड्रोन सर्वेक्षण और आधुनिक मैपिंग तकनीक की मदद से संपत्तियों की पहचान की जाती है तथा निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र संपत्ति मालिकों को प्रॉपर्टी कार्ड जारी किए जाते हैं।
उत्तर प्रदेश में इस प्रॉपर्टी कार्ड को आमतौर पर घरौनी कहा जाता है। अगर आप जानना चाहते हैं कि घरौनी क्या होती है, स्वामित्व योजना में नाम कैसे चेक करें, घरौनी कैसे बनती है और प्रॉपर्टी कार्ड न मिलने पर क्या करना चाहिए, तो इस लेख में आपको पूरी जानकारी मिलेगी।
स्वामित्व योजना क्या है?
स्वामित्व योजना का पूरा नाम Survey of Villages Abadi and Mapping with Improvised Technology in Village Areas है। यह पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार की केंद्रीय क्षेत्र की योजना है।
योजना की शुरुआत 24 अप्रैल 2020 को हुई थी। शुरुआती पायलट चरण के बाद इसे 24 अप्रैल 2021 को देशभर में लॉन्च किया गया।
इस योजना के अंतर्गत ग्रामीण आबादी क्षेत्र की संपत्तियों का सर्वेक्षण करके उनके अधिकार अभिलेख तैयार करने का उद्देश्य है।
योजना में मुख्य रूप से निम्न कार्य किए जाते हैं:
- ग्रामीण आबादी क्षेत्र का ड्रोन से सर्वेक्षण।
- आवासीय संपत्तियों की पहचान और मैपिंग।
- जमीन पर सत्यापन और सीमाओं की जांच।
- दावे और आपत्तियों का निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार निस्तारण।
- पात्र संपत्ति मालिकों को प्रॉपर्टी कार्ड जारी करना।
घरौनी क्या है?
घरौनी ग्रामीण आवासीय संपत्ति से संबंधित एक अधिकार अभिलेख या प्रॉपर्टी कार्ड है। उत्तर प्रदेश में स्वामित्व योजना के तहत जारी किए जाने वाले ग्रामीण संपत्ति कार्ड को घरौनी के नाम से जाना जाता है।
इसमें संबंधित संपत्ति की पहचान और उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार मालिक या अधिकारधारी का नाम, संपत्ति का विवरण, सर्वेक्षण संबंधी जानकारी और अन्य निर्धारित विवरण हो सकते हैं।
घरौनी का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को उनकी आवासीय संपत्ति का दस्तावेजी रिकॉर्ड उपलब्ध कराना है।
ध्यान दें: घरौनी को कृषि भूमि की खतौनी न समझें। दोनों अलग-अलग प्रकार के रिकॉर्ड हैं।

स्वामित्व योजना का उद्देश्य क्या है?
स्वामित्व योजना के प्रमुख उद्देश्य निम्न हैं:
- ग्रामीण आबादी क्षेत्र में संपत्तियों का सटीक रिकॉर्ड तैयार करना।
- मकान और संपत्ति से संबंधित विवादों को कम करने में सहायता करना।
- ग्रामीण परिवारों को उनकी संपत्ति का अधिकार अभिलेख उपलब्ध कराना।
- ग्रामीण संपत्ति को वित्तीय परिसंपत्ति के रूप में उपयोग करने की संभावनाओं को बढ़ाना।
- ग्राम पंचायत स्तर पर बेहतर नियोजन के लिए GIS मैप और सटीक भूमि रिकॉर्ड तैयार करना।
- संपत्ति के उचित आकलन और संपत्ति कर निर्धारण में सहायता करना, जहां लागू हो।
स्वामित्व योजना के फायदे
1. मकान का रिकॉर्ड मिलता है
संपत्ति का निर्धारित सर्वेक्षण और सत्यापन होने के बाद घरौनी या प्रॉपर्टी कार्ड के रूप में रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जा सकता है।
2. संपत्ति विवाद कम करने में मदद
संपत्ति की पहचान, सीमाओं और उपलब्ध रिकॉर्ड से मकान संबंधी विवादों को कम करने में सहायता मिल सकती है।
3. बैंक लोन लेने में सहायता
प्रॉपर्टी कार्ड कुछ परिस्थितियों में बैंकिंग या संस्थागत ऋण के लिए सहायक हो सकता है। हालांकि, केवल घरौनी होने से लोन मिलना सुनिश्चित नहीं होता। बैंक संपत्ति की स्वीकार्यता, कानूनी स्थिति और अपनी शर्तों के अनुसार फैसला करता है।
4. ग्रामीण विकास में मदद
डिजिटल मैप और संपत्ति रिकॉर्ड से ग्राम पंचायत के विकास कार्यों और नियोजन में मदद मिल सकती है।
5. संपत्ति की बेहतर पहचान
सर्वेक्षण के जरिए ग्रामीण आवासीय संपत्तियों का व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार करने में सहायता मिलती है।
स्वामित्व योजना के लिए कौन पात्र हो सकता है?
योजना मुख्य रूप से ग्रामीण आबादी क्षेत्र में स्थित आवासीय संपत्तियों और उनके संबंधित अधिकारधारकों के रिकॉर्ड तैयार करने पर केंद्रित है।
पात्रता और संपत्ति को रिकॉर्ड में शामिल करने का निर्णय संबंधित राज्य के नियमों, गांव की सर्वेक्षण स्थिति और उपलब्ध दस्तावेजों पर निर्भर करता है।
सामान्य तौर पर निम्न परिस्थितियों में संपत्ति का सत्यापन जरूरी हो सकता है:
- ग्रामीण आबादी क्षेत्र में स्थित मकान या आवासीय संपत्ति।
- सर्वेक्षण में शामिल संपत्ति।
- संपत्ति के दावे से संबंधित उपलब्ध रिकॉर्ड।
- स्वामित्व या अधिकार के समर्थन में उपलब्ध दस्तावेज।
- उत्तराधिकार, संयुक्त स्वामित्व या विवाद की स्थिति में संबंधित अतिरिक्त प्रमाण।
महत्वपूर्ण: हर ग्रामीण जमीन या खेत को घरौनी नहीं मिलती। यह योजना सामान्य कृषि भूमि की खतौनी बनवाने वाली योजना नहीं है।
घरौनी बनवाने के लिए कौन-कौन से दस्तावेज चाहिए?
सर्वेक्षण और सत्यापन के दौरान संबंधित अधिकारी आवश्यकता के अनुसार दस्तावेज मांग सकते हैं।
संभावित दस्तावेज:
- आधार कार्ड या अन्य पहचान पत्र।
- उपलब्ध मकान या संपत्ति संबंधी पुराने दस्तावेज।
- जमीन या संपत्ति से संबंधित पूर्व रिकॉर्ड।
- परिवार या उत्तराधिकार से जुड़े दस्तावेज, यदि लागू हों।
- संपत्ति कर या स्थानीय निकाय से संबंधित रसीद, यदि उपलब्ध और प्रासंगिक हो।
- मोबाइल नंबर और संपर्क विवरण।
- दावा या आपत्ति से संबंधित सहायक प्रमाण, यदि जरूरत हो।
यह एक सामान्य तैयारी सूची है, सभी दस्तावेज हर मामले में अनिवार्य नहीं हैं। संबंधित राजस्व विभाग या सर्वेक्षण अधिकारी से अपने मामले की सटीक सूची की पुष्टि करें।
स्वामित्व योजना में घरौनी कैसे बनती है?
घरौनी बनना सामान्य ऑनलाइन फॉर्म भरने की प्रक्रिया भर नहीं है। इसमें सर्वेक्षण, मैपिंग, सत्यापन और राज्य द्वारा निर्धारित प्रक्रियाएं शामिल होती हैं।
चरण 1: गांव का सर्वेक्षण
योजना में शामिल गांव के आबादी क्षेत्र का सर्वेक्षण किया जाता है। इसके लिए ड्रोन तकनीक और सर्वेक्षण उपकरणों का उपयोग किया जा सकता है।
चरण 2: संपत्ति की मैपिंग
सर्वेक्षण से प्राप्त डेटा के आधार पर मकानों और संपत्तियों की पहचान तथा मैपिंग की जाती है।
चरण 3: जमीनी सत्यापन
संपत्ति की पहचान, सीमा और उपलब्ध रिकॉर्ड का सत्यापन संबंधित व्यवस्था के अनुसार किया जाता है।
चरण 4: दावे और आपत्तियां
अगर संपत्ति की सीमा, नाम या अधिकार को लेकर आपत्ति है, तो संबंधित राज्य की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार दावा या आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है।
चरण 5: रिकॉर्ड तैयार होना
सत्यापन और आवश्यक आपत्तियों के निस्तारण के बाद सक्षम प्राधिकारी द्वारा रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया पूरी की जाती है।
चरण 6: घरौनी जारी होना
प्रक्रिया पूरी होने पर पात्र संपत्ति मालिकों के लिए प्रॉपर्टी कार्ड या घरौनी जारी की जाती है। इसकी उपलब्धता और वितरण का तरीका राज्य के अनुसार अलग हो सकता है।
घरौनी ऑनलाइन कैसे चेक करें?
उत्तर प्रदेश में घरौनी और स्वामित्व योजना से जुड़ी जानकारी के लिए राजस्व परिषद की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं।
आधिकारिक पोर्टल: https://svamitva.up.gov.in/
ऑनलाइन जानकारी चेक करने के लिए ये चरण अपनाएं:
- उत्तर प्रदेश स्वामित्व योजना की आधिकारिक वेबसाइट खोलें।
- वेबसाइट पर उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी, सर्वेक्षण या संपत्ति रिकॉर्ड से संबंधित विकल्प देखें।
- यदि संपत्ति खोजने की सुविधा उपलब्ध हो, तो उसमें मांगी गई जानकारी भरें।
- जिला, तहसील, गांव या सर्वेक्षण से संबंधित विवरण उपलब्ध विकल्पों के अनुसार चुनें।
- यदि रिकॉर्ड मिल जाता है, तो दिखाई गई जानकारी ध्यान से जांचें।
- डाउनलोड या प्रिंट का विकल्प उपलब्ध हो तो उसके निर्देशों का पालन करें।
जरूरी बात: पोर्टल पर हर गांव या हर व्यक्ति के लिए एक समान सार्वजनिक सर्च सुविधा उपलब्ध हो, यह जरूरी नहीं है। अगर नाम या रिकॉर्ड ऑनलाइन नहीं मिलता, तो इसका अर्थ यह नहीं कि संपत्ति का कोई अधिकार नहीं है।
प्रॉपर्टी कार्ड का डिजिटल रिकॉर्ड कहां देखें?
केंद्र सरकार के SVAMITVA से संबंधित Property Card पोर्टल पर भी संपत्ति खोजने का विकल्प उपलब्ध हो सकता है:
इस पोर्टल पर जिला, तहसील, गांव और अन्य उपलब्ध विवरण के आधार पर खोज की सुविधा दिखाई जाती है। यह पोर्टल संबंधित क्षेत्र के रिकॉर्ड और उपलब्धता पर निर्भर है। इसे उत्तर प्रदेश के हर गांव के लिए एक सार्वभौमिक सर्च पोर्टल न समझें।
घरौनी नहीं बनी है तो क्या करें?
अगर आपके गांव में सर्वेक्षण हो चुका है, लेकिन आपकी घरौनी अभी तक नहीं मिली है, तो निम्न कदम उठा सकते हैं:
- ग्राम पंचायत या संबंधित स्थानीय कार्यालय से जानकारी लें कि आपके गांव में सर्वेक्षण और रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया किस चरण में है।
- संबंधित लेखपाल या राजस्व विभाग के कार्यालय से अपनी संपत्ति के रिकॉर्ड के बारे में पूछें।
- संपत्ति की पहचान और अधिकार से जुड़े उपलब्ध दस्तावेज साथ रखें।
- अगर आपका नाम गलत है या संपत्ति छूट गई है, तो संबंधित अधिकारी से सुधार या दावा दर्ज करने की निर्धारित प्रक्रिया पूछें।
- आवेदन या शिकायत देने पर प्राप्ति रसीद या संदर्भ संख्या सुरक्षित रखें।
किसी एजेंट को केवल घरौनी जल्दी बनवाने के नाम पर पैसे देने से बचें। किसी भी शुल्क या आवेदन प्रक्रिया की पुष्टि आधिकारिक कार्यालय से करें।
घरौनी में नाम या जमीन की सीमा गलत हो तो क्या करें?
अगर घरौनी में नाम, क्षेत्रफल, संपत्ति की सीमा या अन्य विवरण में गलती है, तो समस्या के प्रकार के अनुसार सुधार प्रक्रिया अलग हो सकती है।
- सामान्य रिकॉर्ड संबंधी गलती के लिए संबंधित राजस्व अधिकारी से संपर्क करें।
- सर्वेक्षण के समय आपत्ति का अवसर उपलब्ध हो तो निर्धारित समय और प्रक्रिया का पालन करें।
- उत्तराधिकार या संयुक्त स्वामित्व के मामले में अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जा सकते हैं।
- यदि स्वामित्व को लेकर विवाद है, तो सक्षम राजस्व प्राधिकारी या जरूरत के अनुसार कानूनी सलाह लें।
बिना सत्यापन के केवल ऑनलाइन रिकॉर्ड को अंतिम निर्णय न मानें।
क्या घरौनी से बैंक लोन मिल सकता है?
घरौनी ग्रामीण संपत्ति को वित्तीय परिसंपत्ति के रूप में उपयोग करने में सहायता कर सकती है। योजना के उद्देश्यों में संस्थागत ऋण तक पहुंच बेहतर बनाना भी शामिल है।
लेकिन बैंक लोन के लिए निम्न बातें देखी जा सकती हैं:
- संपत्ति बैंक के नियमों के अनुसार स्वीकार्य है या नहीं।
- प्रॉपर्टी कार्ड और संबंधित रिकॉर्ड की वैधता तथा सत्यापन।
- संपत्ति पर कोई विवाद या अन्य कानूनी बाधा तो नहीं।
- बैंक की मॉर्गेज, दस्तावेज और पात्रता शर्तें।
- आवेदक की आय और पुनर्भुगतान क्षमता।
इसलिए घरौनी मिलने का मतलब लोन की गारंटी नहीं है।
क्या घरौनी मिलने से मकान बेच सकते हैं?
केवल घरौनी के आधार पर हर स्थिति में मकान की बिक्री संभव मान लेना सही नहीं है।
बिक्री से पहले संपत्ति के अधिकार, स्थानीय कानून, रिकॉर्ड की स्थिति, किसी प्रतिबंध या विवाद और लागू पंजीकरण नियमों की जांच जरूरी हो सकती है।
यदि संपत्ति संयुक्त नाम पर है या उत्तराधिकार का मामला है, तो सभी संबंधित अधिकारों की जांच करना और भी जरूरी है।
स्वामित्व योजना और खतौनी में अंतर
| विवरण | घरौनी | खतौनी |
|---|---|---|
| मुख्य उपयोग | ग्रामीण आबादी की आवासीय संपत्ति का रिकॉर्ड | कृषि/राजस्व भूमि के अधिकार और खातेदारी का रिकॉर्ड |
| सामान्य क्षेत्र | गांव का आबादी क्षेत्र | संबंधित राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज भूमि |
| उद्देश्य | मकान और आवासीय संपत्ति की पहचान व अधिकार रिकॉर्ड | भूमि अधिकार और राजस्व रिकॉर्ड |
| संबंधित रिकॉर्ड | प्रॉपर्टी कार्ड/घरौनी | खतौनी/खाता विवरण |
रिकॉर्ड का सटीक कानूनी प्रभाव राज्य के कानून और संबंधित प्रविष्टियों पर निर्भर करता है।
स्वामित्व योजना 2026: महत्वपूर्ण जानकारी
स्वामित्व योजना का उद्देश्य ग्रामीण आवासीय संपत्तियों के अधिकार अभिलेख तैयार करना है। उत्तर प्रदेश में इसके कार्यान्वयन में राजस्व परिषद, संबंधित राज्य विभाग और सर्वे ऑफ इंडिया की भूमिका रहती है।
योजना की प्रगति, गांव की सर्वेक्षण स्थिति, संपत्ति कार्ड वितरण और समयसीमा से संबंधित जानकारी समय के साथ बदल सकती है। इसलिए किसी विशेष गांव की वर्तमान स्थिति के लिए आधिकारिक पोर्टल या संबंधित राजस्व कार्यालय से पुष्टि करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. स्वामित्व योजना क्या है?
यह भारत सरकार की योजना है, जिसके तहत ग्रामीण आबादी क्षेत्र की आवासीय संपत्तियों का सर्वेक्षण और रिकॉर्ड तैयार किया जाता है।
2. घरौनी किसे कहते हैं?
उत्तर प्रदेश में स्वामित्व योजना के अंतर्गत जारी ग्रामीण आवासीय संपत्ति के प्रॉपर्टी कार्ड या अधिकार अभिलेख को आमतौर पर घरौनी कहते हैं।
3. घरौनी ऑनलाइन कैसे देखें?
उत्तर प्रदेश के स्वामित्व योजना पोर्टल https://svamitva.up.gov.in/ पर उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी और रिकॉर्ड संबंधी विकल्प देखें।
4. घरौनी बनवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन जरूरी है?
हर मामले में अलग से ऑनलाइन आवेदन जरूरी हो, ऐसा नहीं है। प्रक्रिया सर्वेक्षण, गांव की स्थिति और राज्य के निर्धारित नियमों पर निर्भर करती है।
5. घरौनी नहीं मिली तो कहां संपर्क करें?
ग्राम पंचायत, संबंधित लेखपाल या राजस्व विभाग के कार्यालय से सर्वेक्षण और रिकॉर्ड की स्थिति की जानकारी लें।
6. क्या घरौनी से बैंक लोन मिल सकता है?
कुछ परिस्थितियों में सहायता मिल सकती है, लेकिन लोन बैंक की शर्तों और संपत्ति की स्वीकार्यता पर निर्भर है।
7. क्या घरौनी और खतौनी एक ही हैं?
नहीं। घरौनी ग्रामीण आवासीय संपत्ति से जुड़ा रिकॉर्ड है, जबकि खतौनी संबंधित भूमि के राजस्व रिकॉर्ड का हिस्सा होती है।
8. क्या हर गांव में घरौनी बन चुकी है?
नहीं, सभी गांवों या संपत्तियों के रिकॉर्ड की स्थिति समान नहीं होती। अपने गांव की वर्तमान स्थिति आधिकारिक माध्यम से जांचें।
निष्कर्ष
स्वामित्व योजना ग्रामीण परिवारों को उनकी आवासीय संपत्ति का रिकॉर्ड उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। घरौनी के माध्यम से मकान की पहचान, संपत्ति रिकॉर्ड और अधिकारों से संबंधित जानकारी व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।
अगर आपकी घरौनी अभी तक नहीं बनी है या उसमें कोई गलती है, तो संबंधित राजस्व कार्यालय से रिकॉर्ड की स्थिति और सुधार की प्रक्रिया जरूर पता करें।
यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। आवेदन, पात्रता, रिकॉर्ड और कानूनी अधिकारों के लिए संबंधित सरकारी विभाग के नवीनतम निर्देशों को प्राथमिकता दें।